दिल तो मेरे भी पास है
धड़कनो में भी एहसास है
लबों पर वही प्यास है
जज्बातों को भी आश है
आँखों में भी तलाश है
मन में तीन शब्दों की मिठास है,
पर मोहब्बत सिर्फ एहसासों से नहीं
मासूम जज्बातों से नहीं
सिर्फ बातूनी साँसों से नहीं,
होती हैं तो बस रंगीले लिबासों से
और छलकती ग्लासों से
और होती हैं दौलत के हवाईजादो से,
नहीं तो सुदामा की राधा होती
और मीरा भी किसी जोगी के लिए रोती,
प्यार में अंधापन बस एक दिखावा है
पागलपन तो एक ख्याली पहनावा है,
मीरा - राधा के नज़रों में
हम दिवानें तो बस आम हैं
हम दिवानें तो बस आम हैं
क्यूँकि " रणवीरा " भी तो
ना शाह न श्याम है.
ना शाह न श्याम है.
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