Wednesday, 9 September 2015

आम दिवानें

दिल तो मेरे भी पास है
धड़कनो में भी एहसास है
लबों पर वही प्यास है
जज्बातों को भी आश है
आँखों में भी तलाश है
मन में तीन शब्दों की मिठास है,

पर मोहब्बत सिर्फ एहसासों से नहीं
मासूम जज्बातों से नहीं 
सिर्फ बातूनी साँसों से नहीं,

होती हैं तो बस रंगीले लिबासों से 
और छलकती ग्लासों से 
और होती हैं दौलत के हवाईजादो से,

नहीं तो सुदामा की राधा होती 
और मीरा भी किसी जोगी के लिए रोती,

प्यार में अंधापन बस  एक दिखावा है
पागलपन तो एक ख्याली पहनावा है,

मीरा - राधा के नज़रों में
हम दिवानें तो बस आम हैं 
क्यूँकि  " रणवीरा " भी तो
ना शाह न श्याम है. 

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